à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ के लिठसंशय होता है कि तà¥à¤® सफल होंगे या नहीं। इस संशय को मितिया ने महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ के किरदार जरासंद के रूप में समà¤à¤¾à¤¯à¤¾ है। अगà¥à¤¨à¤¿à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤£ मे जरासंध के पिता बà¥à¤°à¤¿à¤¹à¤§à¥ƒà¤¤à¤¾ की जगह समà¥à¤à¤µà¤¾ शबà¥à¤¦ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया गया है। <br>à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ की अनेक समà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ से संशय का जनà¥à¤® होता है और संशय ही à¤à¤¯ का कारण है। <br><br>संशय को हराने के लिठविवेक सà¥à¤µà¤¯à¤‚ काफी नहीं है। उसे à¤à¥€à¤® की जरà¥à¤°à¤¤ होगी। à¤à¥€à¤® का मतलब तरà¥à¤• है। हमे अपने संशय से तारà¥...
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